(सवैया)
सुंदर सुजान पर, मंद मुसुकान पर,
बाँसुरी की तान पर, ठौरन ठगी रहै । [1]
मूरति बिसाल पर, कंचन की माल पर,
खंजन-सी चाल पर, खौरनि सजी रहै॥ [2]
भौंहें धनु मैन पर, लोने जुग नैन पर,
प्रेम भरे बैन पर, "वाहिद" पगी रहै । [3]
चंचल वा तन पर, साँवरे बदन पर,
नंद के नँदन पर, लगन लगी रहै॥ [4]
- श्री वाहिद अली जी
श्रीकृष्ण की सुंदर छवि, मंद मुस्कान और उनकी बांसुरी की तान से देखने-सुनने वाले अपने स्थान पर जड़वत ठगे-से रह जाते हैं। [1]
उनकी विशाल मूर्ति, स्वर्णमाला, खंजन पक्षी जैसी चाल, एवं चंदन का तिलक सजा माथा परम आकर्षक है। [2]
कामदेव के धनुष-सी टेढ़ी भौंहें, सुंदर नयनों की जोड़ी और प्रेम भरे वचनों से वाहिद जी का मन विभोर हो उठता है। [3]
इस चंचल काया और श्यामल मुखमंडल वाले नंद के लला पर मन की लगन सदा लगी रहे — यही कामना है। [4]
सुंदर सुजान पर, मंद मुसुकान पर,
बाँसुरी की तान पर, ठौरन ठगी रहै । [1]
मूरति बिसाल पर, कंचन की माल पर,
खंजन-सी चाल पर, खौरनि सजी रहै॥ [2]
भौंहें धनु मैन पर, लोने जुग नैन पर,
प्रेम भरे बैन पर, "वाहिद" पगी रहै । [3]
चंचल वा तन पर, साँवरे बदन पर,
नंद के नँदन पर, लगन लगी रहै॥ [4]
- श्री वाहिद अली जी
श्रीकृष्ण की सुंदर छवि, मंद मुस्कान और उनकी बांसुरी की तान से देखने-सुनने वाले अपने स्थान पर जड़वत ठगे-से रह जाते हैं। [1]
उनकी विशाल मूर्ति, स्वर्णमाला, खंजन पक्षी जैसी चाल, एवं चंदन का तिलक सजा माथा परम आकर्षक है। [2]
कामदेव के धनुष-सी टेढ़ी भौंहें, सुंदर नयनों की जोड़ी और प्रेम भरे वचनों से वाहिद जी का मन विभोर हो उठता है। [3]
इस चंचल काया और श्यामल मुखमंडल वाले नंद के लला पर मन की लगन सदा लगी रहे — यही कामना है। [4]

