करै कृपा जब लाड़िली, मिटै हिये भ्रम जाल - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा रस सिद्धांत (5)

करै कृपा जब लाड़िली, मिटै हिये भ्रम जाल - श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा रस सिद्धांत (5)

करै कृपा जब लाड़िली, मिटै हिये भ्रम जाल ।
चरन कमल की देत है, सेवा सहज रसाल ॥

- श्री अली माधुरी जी, श्री निकुंज केलि माधुरी, श्री राधा रस सिद्धांत (5)

जब लाड़िली जी (श्री राधा) कृपा करती हैं तब हृदय के समस्त भ्रम-जाल स्वतः ही मिट जाते हैं । वे अपने श्रीचरणों की सेवा प्रदान कर जीव को सहज ही प्रेम-रस में सराबोर कर देती हैं।