(रसिया)
नेंक आगे आ श्याम तोपे रंग डारूँ।
रंग डारूँ तेरे मरवट माड़ूँ, गालन पै गुलचा मारूँ॥ [1]
एड़ी टेढ़ी पगिया बाँधू, पगिया पै फुलरी पारूँ।
‘पुरुषोत्तम’ प्रभु की छवि निरखै, तन मन धन जीवन वारूँ॥ [2]
- श्री पुरुषोत्तम जी
एक गोपी प्रेमपूर्वक कहती है— “हे श्यामसुंदर! थोड़ा और आगे आओ, मैं तुम्हें रंग लगाऊँ, तुम्हारे मस्तक और कपोलों पर गुलाल लगा दूँ।” [1]
तुम्हारी पगड़ी तिरछी हो गई है, आओ, मैं इसे फूलों से सजाकर संवार दूँ। श्री पुरुषोत्तम जी प्रेमभाव से कहते हैं— “हे मोहन! तुम्हारी इस अनुपम छवि पर मैं अपना तन, मन, धन एवं संपूर्ण जीवन न्योछावर कर दूँ।” [2]
नेंक आगे आ श्याम तोपे रंग डारूँ।
रंग डारूँ तेरे मरवट माड़ूँ, गालन पै गुलचा मारूँ॥ [1]
एड़ी टेढ़ी पगिया बाँधू, पगिया पै फुलरी पारूँ।
‘पुरुषोत्तम’ प्रभु की छवि निरखै, तन मन धन जीवन वारूँ॥ [2]
- श्री पुरुषोत्तम जी
एक गोपी प्रेमपूर्वक कहती है— “हे श्यामसुंदर! थोड़ा और आगे आओ, मैं तुम्हें रंग लगाऊँ, तुम्हारे मस्तक और कपोलों पर गुलाल लगा दूँ।” [1]
तुम्हारी पगड़ी तिरछी हो गई है, आओ, मैं इसे फूलों से सजाकर संवार दूँ। श्री पुरुषोत्तम जी प्रेमभाव से कहते हैं— “हे मोहन! तुम्हारी इस अनुपम छवि पर मैं अपना तन, मन, धन एवं संपूर्ण जीवन न्योछावर कर दूँ।” [2]

