जागत सोवत स्वप्न में भोर द्योस निश सांझ - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (35)

जागत सोवत स्वप्न में भोर द्योस निश सांझ - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (35)

जागत सोवत स्वप्न में, भोर द्योस निश सांझ।
श्री वल्लभ व्रज ईश के, चरण धरो हिय माँझ॥

- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (35)

चाहे जाग्रत अवस्था हो, निद्रा हो या स्वप्न; चाहे प्रातःकाल, मध्यान्ह, संध्या या रात्रि का समय हो, सदा सर्वदा ब्रजेश्वर श्री कृष्णचंद्र के चरणकमलों को अपने हृदय में बसा कर रखो ।