बहु बिधि मर्दन करें  - श्री भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ (11.6.3)

बहु बिधि मर्दन करें - श्री भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ (11.6.3)

बहु बिधि मर्दन करें, नहीं चैतन्य होइ सब।
भगवत रस की बात, कहा जानै बिनु अनुभव॥

- श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ (11.6.3)

भगवतरसिक जी कहते हैं कि भले ही कोई कितनी ही दवाओं से और कितने ही प्रकार से मुर्दे की मालिश क्यों न करे, वह कभी जिन्दा नहीं हो सकता। इसी प्रकार रस का अनुभव न रखने वाले नीरस व्यक्ति को कितना ही समझाइये, कितना ही पढ़ाइये, वह रस की बात को समझ ही नहीं सकता।