प्रिया चरण सौं भई है, अंकित अवनि रसाल।
सो रज बंदत रसिक पिय, लोटत करत निहाल॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.38)
श्री प्रिया जी (श्री राधा) के चरणों से अंकित श्री धाम वृंदावन की भूमि परम रसाल है, जिसकी परम पावन रज का स्वयं रसिक शिरोमणि भगवान श्री कृष्ण भी वंदन करते हैं एवं उसमें लोटने से वे भी निहाल हो जाते हैं ।
सो रज बंदत रसिक पिय, लोटत करत निहाल॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.38)
श्री प्रिया जी (श्री राधा) के चरणों से अंकित श्री धाम वृंदावन की भूमि परम रसाल है, जिसकी परम पावन रज का स्वयं रसिक शिरोमणि भगवान श्री कृष्ण भी वंदन करते हैं एवं उसमें लोटने से वे भी निहाल हो जाते हैं ।

