जाकी मायावश बिरंचि शिव, नाचत पार न पायो।
करतल ताल बजाय ब्रज, युवतिन नाच नचायो॥
- ब्रज के दोहे
जिन भगवान श्रीकृष्ण की माया से मोहित होकर ब्रह्मा और शिव भी उनके इशारों पर नाचते हैं, फिर भी उनका पार नहीं पा सकते, उन्हीं श्रीकृष्ण को ब्रजांगनाएँ अपने प्रेम के बल से, अपनी तालियों की लय पर नचाती हैं।
करतल ताल बजाय ब्रज, युवतिन नाच नचायो॥
- ब्रज के दोहे
जिन भगवान श्रीकृष्ण की माया से मोहित होकर ब्रह्मा और शिव भी उनके इशारों पर नाचते हैं, फिर भी उनका पार नहीं पा सकते, उन्हीं श्रीकृष्ण को ब्रजांगनाएँ अपने प्रेम के बल से, अपनी तालियों की लय पर नचाती हैं।

