प्रेम दिवाने जो भये, कहैं बहकते बैन।
सहजो मुख हाँसी छुटै, कबहू टपकै नैन॥
- श्री सहजो बाई
जो प्रभु-प्रेम में मतवाले होते हैं, उनकी बातें सांसारिक लोगों को अटपटी और विचित्र लगती हैं। वे पल भर में प्रभु की याद में अश्रु बहाते हैं, तो अगले ही क्षण हँसने लगते हैं।
सहजो मुख हाँसी छुटै, कबहू टपकै नैन॥
- श्री सहजो बाई
जो प्रभु-प्रेम में मतवाले होते हैं, उनकी बातें सांसारिक लोगों को अटपटी और विचित्र लगती हैं। वे पल भर में प्रभु की याद में अश्रु बहाते हैं, तो अगले ही क्षण हँसने लगते हैं।

