श्रीराधाचरण प्रधान - श्री नाभादास, भक्तमाल (90)

श्रीराधाचरण प्रधान - श्री नाभादास, भक्तमाल (90)

(छप्पय)
श्रीराधाचरण प्रधान हृदै अति सुदृढ़ उपासी।
कुंज केलि दम्पति तहाँ की करत खवासी॥ [1]
सर्वसु महाप्रसाद प्रसिद्ध ताके अधिकारी।
विधि निषेध नहिं दास अनन्य उत्कट व्रतधारी॥ [2]
श्री व्यास सुवन पथ अनुसरै सोई भलै पहिचानिहै।
श्रीहरिवंश गुसाईं भजन की रीति सुकृत कोउ जानिहै॥ [3]

- श्री नाभादास, भक्तमाल (90)

श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी का वर्णन करते हुए श्री नाभा दास जी कहते हैं -

श्री हित हरिवंश जी श्री राधा के चरण-कमलों के सुदृढ़ उपासक हैं, अर्थात् उनकी उपासना का मुख्य आधार केवल श्री राधा चरणों की आराधना ही है । वे सदा निकुंज की मधुर केली लीलाओं में संलग्न युगल दंपति की परम खवासी (सेवा) करते हैं । [1]

श्री हरिवंश जी की श्री राधा के महाप्रसाद में अनन्य निष्ठा थी, और वे ही इसके परम अधिकारी माने जाते हैं । उनके लिए किसी भी शास्त्रीय विधि-निषेध का कोई बंधन नहीं था, क्योंकि उनका एकमात्र धर्म श्री राधा को प्रेमपूर्वक लाड़ लड़ाना ही था। यही उनका अखंड व्रत था । [2]

जो भी व्यास जी के पुत्र, श्री हरिवंश जी के पथ का अनुसरण करता है, वही उन्हें वास्तविक रूप से पहचान सकता है। श्री नाभा दास जी कहते हैं कि श्री हरिवंश गोसाईं जी की भजन-रीति कोई परम सौभाग्यशाली भक्त ही समझ सकता है । [3]