(कवित्त)
फूले हैं पलास आस पास बन बागन में,
मधुर मधुर टेर कोकिला लगाई है। [1]
गुंजत मधुर पुंज कुंज कुंजन में,
शीतल सुगन्ध मंद पवन सुहाई है॥ [2]
‘लाल बलवीर’ बस बालम विदेश रहे,
को करे सहाय पीर मैन को सवाई है। [3]
पथिक प्रवीन प्यारे इतनी कृपा करिके,
कहियो जाय कंत सों बसंत ऋतु आई है॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, षड्ऋतु शतक, बसन्त ऋतु (26)
चारों ओर पलाश के फूल खिल उठे हैं, जिनकी मनोहर छटा ने वनों और उपवनों को रंगों से भर दिया है। कोयल अपनी मधुर वाणी में कूकने लगी है, मानो प्रेम का संदेश सुना रही हो। [1]
घने निकुंजों में भौरों की गुंजार प्रेम का मधुर संगीत गा रही है। शीतल, सुगंधित पवन मंद-मंद प्रवाहित हो रही है, जिससे इस वसंत ऋतु की रमणीयता और भी दिव्य प्रतीत हो रही है। [2]
श्री लाल बलबीर कहते हैं—“यदि प्रियतम किसी अन्य देश में बस गया हो, तो मेरे हृदय की पीड़ा को कौन शांति देगा? कौन मेरी विरह वेदना को सांत्वना देगा?” [3]
हे प्रवीण पथिक! मैं तुमसे विनती करता हूँ—यदि कहीं मेरे प्रियतम श्री कृष्ण से तुम्हारी भेंट हो तो कृपा कर उन्हें मेरा यह संदेश देना और कहना—“हे श्यामसुंदर! वसंत ऋतु का आगमन हो चुका है, अब तो पधारो!” [4]
फूले हैं पलास आस पास बन बागन में,
मधुर मधुर टेर कोकिला लगाई है। [1]
गुंजत मधुर पुंज कुंज कुंजन में,
शीतल सुगन्ध मंद पवन सुहाई है॥ [2]
‘लाल बलवीर’ बस बालम विदेश रहे,
को करे सहाय पीर मैन को सवाई है। [3]
पथिक प्रवीन प्यारे इतनी कृपा करिके,
कहियो जाय कंत सों बसंत ऋतु आई है॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, षड्ऋतु शतक, बसन्त ऋतु (26)
चारों ओर पलाश के फूल खिल उठे हैं, जिनकी मनोहर छटा ने वनों और उपवनों को रंगों से भर दिया है। कोयल अपनी मधुर वाणी में कूकने लगी है, मानो प्रेम का संदेश सुना रही हो। [1]
घने निकुंजों में भौरों की गुंजार प्रेम का मधुर संगीत गा रही है। शीतल, सुगंधित पवन मंद-मंद प्रवाहित हो रही है, जिससे इस वसंत ऋतु की रमणीयता और भी दिव्य प्रतीत हो रही है। [2]
श्री लाल बलबीर कहते हैं—“यदि प्रियतम किसी अन्य देश में बस गया हो, तो मेरे हृदय की पीड़ा को कौन शांति देगा? कौन मेरी विरह वेदना को सांत्वना देगा?” [3]
हे प्रवीण पथिक! मैं तुमसे विनती करता हूँ—यदि कहीं मेरे प्रियतम श्री कृष्ण से तुम्हारी भेंट हो तो कृपा कर उन्हें मेरा यह संदेश देना और कहना—“हे श्यामसुंदर! वसंत ऋतु का आगमन हो चुका है, अब तो पधारो!” [4]

