जोग जज्ञ तप नेम करि, भजै नहीं गोविन्द।
‘छौना’ हरि के नाम बिन, छूटे नहीं भव फन्द॥
- श्री गुरु छौनाजी महाराज
भले ही कोई योग, यज्ञ, तपस्या अथवा कठोर व्रतों का पालन करता रहे, परंतु यदि उसने श्री गोविंद का डट कर भजन नहीं किया, यदि वह हरि नाम के सुमिरन से वंचित रहा, तो वह कभी भी संसार के बंधनों से मुक्त नहीं हो सकता।
‘छौना’ हरि के नाम बिन, छूटे नहीं भव फन्द॥
- श्री गुरु छौनाजी महाराज
भले ही कोई योग, यज्ञ, तपस्या अथवा कठोर व्रतों का पालन करता रहे, परंतु यदि उसने श्री गोविंद का डट कर भजन नहीं किया, यदि वह हरि नाम के सुमिरन से वंचित रहा, तो वह कभी भी संसार के बंधनों से मुक्त नहीं हो सकता।

