पायन पायली जगमग जोति - श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (109)

पायन पायली जगमग जोति - श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (109)

पायन पायली जगमग जोति ।
नव नवरतन दीप से सोहैं, टोरा बड़िडे मोती॥ [1]
ता पर नुपुर सुभग बिराजें, केलि कला उद्योति ।
अलबेली पिय हिय को गहिनो, नवल प्रेम रस सोती॥ [2]

- श्री अलबेली अलि, समय प्रबन्ध (109)

श्री राधा के चरणकमलों में सुसज्जित पायल की ज्योति ऐसी जगमगा रही है मानो नवीन नौ रत्नों के दीपक अपनी दिव्य आभा बिखेर रहे हों जो बड़े, कंचन मोतियों में गुंथे हुए हैं। [1]

उनके चरणों में सुशोभित नूपुर एवं उसकी मधुर ध्वनि तो मानो प्रेम क्रीड़ाओं (केली कला) को साक्षात प्रकाशित करने वाली हैं । श्री अलबेली अलि कहती हैं—“श्री राधा के चरणकमल ही प्रियतम श्री कृष्ण के हृदय के अनमोल गहने हैं, जिनसे नवीन प्रेम रस की अविरल धारा सतत प्रवाहित होती रहती है।” [2]