वृन्दावन की याद जो आवत है मन मांहि - श्री रामराय, गीत गोविंद ब्रज भाषा, दोहा (85)

वृन्दावन की याद जो आवत है मन मांहि - श्री रामराय, गीत गोविंद ब्रज भाषा, दोहा (85)

वृन्दावन की याद जो, आवत है मन मांहि।
तबही राधा नागरी, पति संग ताहि सरांहि॥

- श्री रामराय, गीत गोविंद ब्रज भाषा, दोहा (85)

जिस किसी को वृंदावन की याद आती है उसी क्षण श्री राधा अपने प्रियतम (श्रीकृष्ण) संग उस व्यक्ति को कृपापूर्वक स्वीकार कर उसकी सराहना करती हैं।