सब ब्रज गोपिन के बसी, बात यहै मन आन।
हरि-राधा दोऊ मिलैं, निशि वासर यह ध्यान॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
ब्रज की समस्त गोपियों के हृदय में केवल एक ही भावना व्याप्त है - 'श्री कृष्ण और श्री राधा दोनों मिले रहें', और यही युगल स्वरूप रात-दिन उनके ध्यान का एकमात्र विषय बना रहे।
हरि-राधा दोऊ मिलैं, निशि वासर यह ध्यान॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
ब्रज की समस्त गोपियों के हृदय में केवल एक ही भावना व्याप्त है - 'श्री कृष्ण और श्री राधा दोनों मिले रहें', और यही युगल स्वरूप रात-दिन उनके ध्यान का एकमात्र विषय बना रहे।

