प्रभुता ही को सब मरो प्रभु को मरै न कोय - श्री मलूक दास

प्रभुता ही को सब मरो प्रभु को मरै न कोय - श्री मलूक दास

प्रभुता ही को सब मरो, प्रभु को मरै न कोय।
जो कोई प्रभु को मरै, तो प्रभुता दासी होय॥

- श्री मलूक दास

हर कोई प्रभुता चाहता है, परंतु कोई स्वयं प्रभु को नहीं चाहता। यदि कोई प्रभु को समर्पित हो जाए, तो प्रभुता भी उसकी दासी बन जाए।