(राग ललित)
खेलत फाग सुहाग भरी अनुराग भरी बड़भागि पिया सूँ। [1]
बाल गुलाल लै लाल पै डारत, निहाल होय लाल लगाव हिया सूँ॥ [2]
केसर की पिचकारी भरैं पिय, छिरकहिं छींट सनेह जिया सूँ। [3]
‘वृन्दावन’ दंपति छवि निरखत, कौन करे रति काम मया सूँ॥ [4]
- श्री हित वृंदावन दास
परम सौभाग्यवती लाडली श्री राधा अनुराग से भरी प्रियतम लालजी (श्री कृष्ण) संग होली खेल रही हैं । [1]
वे गुलाल भर कर लालजी के ऊपर डाल रही हैं। श्री लालजी निहाल होकर हृदय से लगा रहे हैं । [2]
प्रियतम लालजी केसर की पिचकारी भरकर, श्री राधिका पर प्रेम से छिड़क रहे हैं । [3]
श्री हित वृंदावन दास जी कहते हैं कि दिव्य दंपति (श्री राधा कृष्ण) की इस सुंदर छवि को निहार कर, रति-कामदेव की जोड़ी से कौन ममत्व करेगा? [4]
खेलत फाग सुहाग भरी अनुराग भरी बड़भागि पिया सूँ। [1]
बाल गुलाल लै लाल पै डारत, निहाल होय लाल लगाव हिया सूँ॥ [2]
केसर की पिचकारी भरैं पिय, छिरकहिं छींट सनेह जिया सूँ। [3]
‘वृन्दावन’ दंपति छवि निरखत, कौन करे रति काम मया सूँ॥ [4]
- श्री हित वृंदावन दास
परम सौभाग्यवती लाडली श्री राधा अनुराग से भरी प्रियतम लालजी (श्री कृष्ण) संग होली खेल रही हैं । [1]
वे गुलाल भर कर लालजी के ऊपर डाल रही हैं। श्री लालजी निहाल होकर हृदय से लगा रहे हैं । [2]
प्रियतम लालजी केसर की पिचकारी भरकर, श्री राधिका पर प्रेम से छिड़क रहे हैं । [3]
श्री हित वृंदावन दास जी कहते हैं कि दिव्य दंपति (श्री राधा कृष्ण) की इस सुंदर छवि को निहार कर, रति-कामदेव की जोड़ी से कौन ममत्व करेगा? [4]

