नैन बैन राधा गहे, रहे प्रीति के टारि  - श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (102.2)

नैन बैन राधा गहे, रहे प्रीति के टारि - श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (102.2)

नैन बैन राधा गहे, रहे प्रीति के टारि।
राधा के सखि बदन लखि, रोम-रोम फुलवारि॥

- श्री वंशी अलि, माधुर्य शत (102.2)

श्री राधा नागरी ने सखियों के नयनों एवं वाणी को पकड़कर अपनी प्रीति के वशीभूत कर लिया है। अब श्री राधा मुख को देख-देखकर सखियों के रोम-रोम में फुलवारी फूल उठी है।