नागिरि नागर भाव तैं मंगल रूप रसाल - श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (92.2)

नागिरि नागर भाव तैं मंगल रूप रसाल - श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (92.2)

नागिरि नागर भाव तैं, मंगल रूप रसाल।
नित मंगल वृन्दाविपुन, नित्य फाग रस ख्याल॥

- श्री नागरीदास (महाराज सावंत सिंह जी), श्री नागरीदास जी की वाणी, उत्सव माला (92.2)

दिव्य युगल श्री राधा-कृष्ण अद्भुत रस को बरसाने वाली परम मंगलकारी जोड़ी हैं। नित्य मंगलमयी भूमि श्रीधाम वृंदावन में, प्रेम और रस की दिव्य होली नित्य ही उत्सव के रूप में खेली जाती है।