मेरे प्यारे मोहना, मेरे मनके चोर ।
तेरो मुख देखे बिना, दीखत नहिं कोई और ॥
- ब्रज के दोहे
हे मेरे प्यारे मनमोहन, हे मेरे चित्त चुराने वाले चोर! तुम्हारे मुखारविंद के दर्शन करे बिना, मेरे नेत्रों को कुछ भी दिखाई नहीं देता।
तेरो मुख देखे बिना, दीखत नहिं कोई और ॥
- ब्रज के दोहे
हे मेरे प्यारे मनमोहन, हे मेरे चित्त चुराने वाले चोर! तुम्हारे मुखारविंद के दर्शन करे बिना, मेरे नेत्रों को कुछ भी दिखाई नहीं देता।

