धन धन वृन्दावन के बासी।
आठौं पहर रहत या ब्रज में राधा कृष्ण उपासी॥ [1]
इन के घर पर लेत मधुकरी वीतराग संन्यासी।
याकी महिमा सोई जाने दृढ़ श्रद्धा बिसवासी॥ [2]
जा वृन्दावन की रज परसत कटि हैं लख चौरासी।
'श्यामसखा' वृन्दावन रहिये सहज मिले अविनासी॥ [3]
- श्री श्यामसखा जी
श्री धाम वृंदावन के वासी धन्य, धन्य हैं जो आठों पहर श्री राधा-कृष्ण की प्रेममयी भक्ति में मग्न रहते हैं। [1]
वैराग्य धारण किए हुए संन्यासी भी, अपनी तपस्या को सार्थक करने हेतु उनके द्वार पर भिक्षा माँगते हैं। केवल दृढ़ श्रद्धा वाले भक्त ही इन ब्रजवासियों की अनुपम महिमा को समझ सकते हैं। [2]
वृंदावन की पावन रज का स्पर्श मात्र ही असंख्य जन्म-मरण (84 लाख योनियों) के बंधन को समाप्त कर देता है। श्री श्याम सखा कहते हैं— वृंदावन में वास करो क्योंकि यहाँ सनातन और अविनाशी जीवन धन सहज ही प्राप्त होता है। [3]
आठौं पहर रहत या ब्रज में राधा कृष्ण उपासी॥ [1]
इन के घर पर लेत मधुकरी वीतराग संन्यासी।
याकी महिमा सोई जाने दृढ़ श्रद्धा बिसवासी॥ [2]
जा वृन्दावन की रज परसत कटि हैं लख चौरासी।
'श्यामसखा' वृन्दावन रहिये सहज मिले अविनासी॥ [3]
- श्री श्यामसखा जी
श्री धाम वृंदावन के वासी धन्य, धन्य हैं जो आठों पहर श्री राधा-कृष्ण की प्रेममयी भक्ति में मग्न रहते हैं। [1]
वैराग्य धारण किए हुए संन्यासी भी, अपनी तपस्या को सार्थक करने हेतु उनके द्वार पर भिक्षा माँगते हैं। केवल दृढ़ श्रद्धा वाले भक्त ही इन ब्रजवासियों की अनुपम महिमा को समझ सकते हैं। [2]
वृंदावन की पावन रज का स्पर्श मात्र ही असंख्य जन्म-मरण (84 लाख योनियों) के बंधन को समाप्त कर देता है। श्री श्याम सखा कहते हैं— वृंदावन में वास करो क्योंकि यहाँ सनातन और अविनाशी जीवन धन सहज ही प्राप्त होता है। [3]

