कृपा सागरी नागरी, वेई पूजवैं आश।
इहि बल वेपरवाह नित, श्री वृन्दावन वास॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.97)
कृपा की अथाह सागर, श्री राधा महारानी ही मेरी समस्त आशाओं को पूर्ण करने वाली हैं। एक उनके बल पर ही मैं सदा परम निश्चिंत अवस्था में रहता हूँ और श्री वृंदावन में वास करने का सौभाग्य प्राप्त कर रहा हूँ।
इहि बल वेपरवाह नित, श्री वृन्दावन वास॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.97)
कृपा की अथाह सागर, श्री राधा महारानी ही मेरी समस्त आशाओं को पूर्ण करने वाली हैं। एक उनके बल पर ही मैं सदा परम निश्चिंत अवस्था में रहता हूँ और श्री वृंदावन में वास करने का सौभाग्य प्राप्त कर रहा हूँ।

