(सवैया)
वे उनकी धरे मोर पखा सिर, वे उनकी धरे चंद्रिका प्यारी। [1]
वे उनकी धरे पीतपटी इत, वे उनकी सजें सुंदर सारी॥ [2]
देखत ही बन आबै छटा, व्रजचन्द्र ने कुञ्जन आय सम्हारी। [3]
वृषभानुलली बनी नंदलाला, बने नंदलाला वृषभानुदुलारी॥ [4]
- ब्रज के सवैया
आज श्रीराधा ने अपने प्रियतम श्रीकृष्ण का मोर मुकुट धारण किया है, और श्रीकृष्ण ने श्रीराधा की मोर चंद्रिका को अपने शीश पर सजाया है। [1]
श्रीराधा ने पीतांबर ओढ़ा है, और श्रीकृष्ण ने सुंदर साड़ी को धारण किया है। [2]
जब यह दो चंद्रमा निकुंज में आए, समस्त निकुंज उनके रूप-सौंदर्य के प्रकाश से दैदीप्यमान हो उठा। [3]
आज बरसाना की लल्ली राधा नंदलाल बनी हैं और नंदकिशोर राधा-रूप में सुशोभित हैं। [4]
वे उनकी धरे मोर पखा सिर, वे उनकी धरे चंद्रिका प्यारी। [1]
वे उनकी धरे पीतपटी इत, वे उनकी सजें सुंदर सारी॥ [2]
देखत ही बन आबै छटा, व्रजचन्द्र ने कुञ्जन आय सम्हारी। [3]
वृषभानुलली बनी नंदलाला, बने नंदलाला वृषभानुदुलारी॥ [4]
- ब्रज के सवैया
आज श्रीराधा ने अपने प्रियतम श्रीकृष्ण का मोर मुकुट धारण किया है, और श्रीकृष्ण ने श्रीराधा की मोर चंद्रिका को अपने शीश पर सजाया है। [1]
श्रीराधा ने पीतांबर ओढ़ा है, और श्रीकृष्ण ने सुंदर साड़ी को धारण किया है। [2]
जब यह दो चंद्रमा निकुंज में आए, समस्त निकुंज उनके रूप-सौंदर्य के प्रकाश से दैदीप्यमान हो उठा। [3]
आज बरसाना की लल्ली राधा नंदलाल बनी हैं और नंदकिशोर राधा-रूप में सुशोभित हैं। [4]

