श्याम लाल बैन्दी बनी, शोभा बड़ी अपार ।
प्रगट विराजत ससिन पर, मनु अनुराग सिंगार ॥
- ब्रज के दोहे
श्रीकृष्ण स्वयं को श्री राधा के मस्तक पर सुशोभित लाल बिंदी में रूपांतरित कर देते हैं, जो अनंत सौंदर्य को प्रकट करती है। अपनी प्रिया के मुखचंद्र पर एक अलंकार बनकर श्यामसुंदर अपनी अद्भुत प्रीति को प्रकट करते हैं, और स्वयं को उनके श्रृंगार का एक भाग बना देते हैं।
प्रगट विराजत ससिन पर, मनु अनुराग सिंगार ॥
- ब्रज के दोहे
श्रीकृष्ण स्वयं को श्री राधा के मस्तक पर सुशोभित लाल बिंदी में रूपांतरित कर देते हैं, जो अनंत सौंदर्य को प्रकट करती है। अपनी प्रिया के मुखचंद्र पर एक अलंकार बनकर श्यामसुंदर अपनी अद्भुत प्रीति को प्रकट करते हैं, और स्वयं को उनके श्रृंगार का एक भाग बना देते हैं।

