तस्योभयतटी रम्या - पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 69, छंद 77, 78

तस्योभयतटी रम्या - पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 69, छंद 77, 78

तस्योभयतटी रम्या शुद्धकांचननिर्मिता ।
गंगाकोटिगुणा प्रोक्ता यत्र स्पर्शवराटकः ॥
कर्णिकायां कोटिगुणो यत्र क्रीडारतो हरिः ।
कालिंदीकर्णिका कृष्णमभिन्नमेकविग्रहम्॥

- पद्मपुराण, खण्डः 5 (पातालखण्डः), अध्याय 69, छंद 77, 78

भगवान शिव पार्वती माता से कहते हैं - वृंदावन में स्थित यमुना के दोनों तट अत्यंत मनोहर हैं, वे शुद्ध स्वर्ण से निर्मित हैं और वे गंगा से करोड़ों गुना अधिक पुण्यदायिनी मानी जाती हैं, जहाँ के स्पर्श मात्र से ही परम फल की प्राप्ति होती है। उस कर्णिका में श्रीहरि (कृष्ण) असंख्य गुना मधुर एवं आनन्दमयी लीलाओं में संलग्न रहते हैं। कालिंदी कर्णिका (यमुना) और श्रीकृष्ण भिन्न नहीं हैं, वे दोनों एक ही स्वरूप हैं ।