हा-हा हे हरिवंश प्रभु, शरण गही है आय।
जानि दीन दीजे टहल, वृन्दा विपिन बसाय॥
- श्री मगल अलि
हे श्री हित हरिवंश महाप्रभु! मैं आपकी शरण में आया हूँ। कृपा कर मुझे दीन जानकर प्रिया-प्रियतम के निज महल की टहल (सेवा) प्रदान करें, और ऐसा वर दीजिए कि मैं सदा श्री वृंदावन में वास कर सकूँ।
जानि दीन दीजे टहल, वृन्दा विपिन बसाय॥
- श्री मगल अलि
हे श्री हित हरिवंश महाप्रभु! मैं आपकी शरण में आया हूँ। कृपा कर मुझे दीन जानकर प्रिया-प्रियतम के निज महल की टहल (सेवा) प्रदान करें, और ऐसा वर दीजिए कि मैं सदा श्री वृंदावन में वास कर सकूँ।

