मुस्क्यानि तिहारी जो मेंने लखी - ताज बेगम

मुस्क्यानि तिहारी जो मेंने लखी - ताज बेगम

(सवैया)
मुस्क्यानि तिहारी जो मेंने लखी, लखि के मन में अति नेह जुटानो । [1]
जो तुम चाहत एक बिसे, हम एक के बीस बिसे तेहि मानो ॥ [2]
राह बड़ी है जो प्रेम के पंथ की, चातुर होय सोई चित आनो । [3]
जीवन ताज कहे जग में, तुक चारहि आदि के अक्षर जानो ॥ [4]

- ताज़ बेगम (ताज़ बीबी)

इस पद में ताज बीबी कहती हैं — हे कृष्ण! जब से तुम्हारी उस मोहक मुस्कान को मेरे नेत्रों ने निहारा है, तब से मेरा हृदय प्रेम-रस से सराबोर हो गया है। [1]

यदि तुम हमसे किसी एक विषय की अपेक्षा करोगे, तो हम उसकी महत्ता को बीस विषयों के समान मानकर उसे अत्यधिक मूल्य देंगे। [2]

प्रेम का मार्ग सरल नहीं है — यह बहुत गूढ़ और कठिन रास्ता है, जिसमें वही सफल हो सकता है जो समझदार, निष्कपट और सच्चे मन से प्रेम करने वाला हो। [3]

ताज़ जी कहती हैं कि इस जीवन की परम सार्थकता केवल प्रेम में ही है — जिसने प्रेम को जान लिया, उसने वास्तव में सब कुछ जान लिया। [4]