वृन्दावन सुख अन्त नहीं, स्थल युगल निवास ।
कमलापुर हूके सदा, करत आस ब्रज वास ॥
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (10)
सब रसों का सार रस, वृंदावन रस अनंत है क्योंकि यह युगल किशोर श्री राधा-कृष्ण का नित्य निवास स्थान है। स्वयं भगवान श्री हरि भी, कमलापुर (वैकुंठ) में वास करते हुए, निरंतर ब्रज वास की आशा करते हैं।
कमलापुर हूके सदा, करत आस ब्रज वास ॥
- श्री ललित लड़ैती, श्री किशोरी कृपा कटाक्ष, माधुर्य रस दोहावली (10)
सब रसों का सार रस, वृंदावन रस अनंत है क्योंकि यह युगल किशोर श्री राधा-कृष्ण का नित्य निवास स्थान है। स्वयं भगवान श्री हरि भी, कमलापुर (वैकुंठ) में वास करते हुए, निरंतर ब्रज वास की आशा करते हैं।

