अटकी नाव कुठौर में पड़ी भौंरू बिच आय - श्री रामस्वरूप जी

अटकी नाव कुठौर में पड़ी भौंरू बिच आय - श्री रामस्वरूप जी

अटकी नाव कुठौर में, पड़ी भौंरू बिच आय ।
अहो लली वृषभान की, तुम बिन कौन सहाय ॥

- श्री रामस्वरूप जी

मेरे जीवन की नाव मंझधार के बीच, भयंकर भँवर में उलझकर डूबने को है। हे वृषभानु नंदिनी श्रीराधे! यदि आप मुझे सहारा नहीं देंगी, तो फिर मुझे कौन उबार सकता है?