बेसर कौन की अति नीकी - श्री हित दामोदर दास

बेसर कौन की अति नीकी - श्री हित दामोदर दास

(राग अडानो व धनाश्री)
बेसर कौन की अति नीकी।
होड़ परी लालन अरु ललना, चौंप बढ़ी अति जी की॥ [1]
न्याय पर्यौं ललिता जू के आगें, कौन ललित कौन फीकी।
जै श्रीदामोदर हित विलग न मानों, झुकन झुकी प्यारी जू की॥ [2]

- श्री हित दामोदर दास

बेसर (बुलाक) कौन की अधिक सुंदर है ? इस बात पर प्रिया-प्रियतम में होड़ लग गई और हृदय की चौंप बढ़ गई । [1]

श्री ललिताजी के आगे न्याय डाला गया कि किसी बेसर ललित है और किसी फीकी है? श्री दामोदर दास जी कहते हैं कि फिर ललिता जी निर्णय देती हैं, “आप बुरा न मानें परंतु बेसर की झुकन तो श्यामा जू की ही अधिक झुकी हुई है ।” [2]