भक्तानानन्दसंदोहवर्द्धिनि ज्येष्ठचिन्तने ।
कोटिचन्द्रार्कसंहर्त्री राधिके त्वं प्रसीद मे ॥
- सनत्कुमार संहिता, श्रीराधास्तोत्रं (3)
भक्तों के आनंद का वर्धन करने वाली, ध्यान का परम विषय, करोड़ों सूर्य-चन्द्रों की कान्ति को हेय कर देने वाली, हे राधिका, मुझ पर कृपा करो!
कोटिचन्द्रार्कसंहर्त्री राधिके त्वं प्रसीद मे ॥
- सनत्कुमार संहिता, श्रीराधास्तोत्रं (3)
भक्तों के आनंद का वर्धन करने वाली, ध्यान का परम विषय, करोड़ों सूर्य-चन्द्रों की कान्ति को हेय कर देने वाली, हे राधिका, मुझ पर कृपा करो!

