श्री बिशोक नंदिनी बिनु कौहै ।
हम से अधम ओर निरबाहक, यह जस और को सोहै ॥ [1]
जाकौ मन इन पद रस लाग्यौ, सो क्यों सकै इक छिन कवि छौहै ।
जय श्री बंसी अलि श्रीराधा जीवन धन, जाको बदन कुंवरि नित जौहै ॥ [2]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (37)
श्री बिशोक नंदिनी, श्री ललिता जी के अतिरिक्त और कौन है जो मेरे जैसे पतित जीव का उद्धार और निर्वाह कर सके? ऐसी अहेतुकी करुणा और अनंत दया तो केवल श्री ललिता सखी को ही शोभा देती है। [1]
जिनका मन श्रीललिता सखी के चरणों के रस में डूबा हो, वह एक क्षण के लिए भी उनकी कृपा से वंचित नहीं रह सकता क्योंकि वे ही राधा प्रेम की जीवंत मूर्ति हैं। श्री वंशी अली जी कहते हैं—“श्री ललिता सखी की जय हो, जिनका प्राण, जीवन-धन, सब कुछ श्री राधा महारानी हैं एवं जिनके मुखकमल का दर्शन राधा कुंवरी नित्य करती हैं।” [2]
हम से अधम ओर निरबाहक, यह जस और को सोहै ॥ [1]
जाकौ मन इन पद रस लाग्यौ, सो क्यों सकै इक छिन कवि छौहै ।
जय श्री बंसी अलि श्रीराधा जीवन धन, जाको बदन कुंवरि नित जौहै ॥ [2]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (37)
श्री बिशोक नंदिनी, श्री ललिता जी के अतिरिक्त और कौन है जो मेरे जैसे पतित जीव का उद्धार और निर्वाह कर सके? ऐसी अहेतुकी करुणा और अनंत दया तो केवल श्री ललिता सखी को ही शोभा देती है। [1]
जिनका मन श्रीललिता सखी के चरणों के रस में डूबा हो, वह एक क्षण के लिए भी उनकी कृपा से वंचित नहीं रह सकता क्योंकि वे ही राधा प्रेम की जीवंत मूर्ति हैं। श्री वंशी अली जी कहते हैं—“श्री ललिता सखी की जय हो, जिनका प्राण, जीवन-धन, सब कुछ श्री राधा महारानी हैं एवं जिनके मुखकमल का दर्शन राधा कुंवरी नित्य करती हैं।” [2]

