गति गरवीली देखि के, मानत मन में लाज ।
याही ते लै धूरि निज, शिर डारत गजराज ॥
- श्री संकेत अली, संकेत लता (92)
श्री राधारानी की अति मनोहर, अति गर्वीली चाल को देखकर गजराज (हाथियों का राजा) भी अपने भीतर लज्जित हो उठता है। इतना विनीत हो जाता है कि वह झुककर श्री राधा जी के चरणों की धूल को लेकर अपने मस्तक पर डालता है और समस्त अभिमान त्याग कर वृंदावन की महारानी का आदर करता है।
याही ते लै धूरि निज, शिर डारत गजराज ॥
- श्री संकेत अली, संकेत लता (92)
श्री राधारानी की अति मनोहर, अति गर्वीली चाल को देखकर गजराज (हाथियों का राजा) भी अपने भीतर लज्जित हो उठता है। इतना विनीत हो जाता है कि वह झुककर श्री राधा जी के चरणों की धूल को लेकर अपने मस्तक पर डालता है और समस्त अभिमान त्याग कर वृंदावन की महारानी का आदर करता है।

