धन धन वृन्दावन की मालिन प्यारी - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (114)

धन धन वृन्दावन की मालिन प्यारी - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (114)

धन धन वृन्दावन की मालिन प्यारी ।
ठाकुर के दरबाजे बैठी, गूंथे माला न्यारी ॥ [1]
गूंथे हार बनावै तुर्रा, करैं जीवका भारी ।
अभयराम ये हू बड़भागिनि, स्यामा स्याम की प्यारी ॥ [2]

- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (114)

श्री वृंदावन धाम की प्यारी मालिन धन्य-धन्य है! वह ठाकुरजी के द्वार पर बैठकर प्रेमपूर्वक उनके लिए सुंदर-सुंदर फूलों की मालाएँ पिरोती हैं। [1]

वह पुष्पमालाएँ, मुकुटों की सजावटें और लटकी हुई झूमरियाँ बनाकर अपनी सरल जीविका चलाती है। श्री अभयराम जी कहते हैं कि यह मालिन अत्यंत भाग्यशाली है, क्योंकि वह श्री श्यामा-श्याम की अत्यंत प्यारी है। [2]