रक्षा करी न जीव की दियो न आदर दान - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (78)

रक्षा करी न जीव की दियो न आदर दान - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (78)

रक्षा करी न जीव की, दियो न आदर दान।
नारायण ता पुरुष सों, रूख भलो फलवान॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (78)

यदि किसी जीव की न तो रक्षा की और न ही उसे आदर-सत्कार दिया, तो ऐसे पुरुष से श्रेष्ठ तो वह वृक्ष है, जो जीवों को निष्काम भाव से छाया और फल प्रदान करता है।