नव किशोरी नव किशोर बनी है विचित्र जोरी - श्री चतुर्भुज दास

नव किशोरी नव किशोर बनी है विचित्र जोरी - श्री चतुर्भुज दास

(राग मल्हार)
नव किशोरी नव किशोर बनी है विचित्र जोरी।
सोभा सिंधु मदन मोहन रूप रासि कामिनी॥ [1]
राजत तन गौर श्याम प्यारी पिय भाग बाम।
नव घन गिरिधरन अंग संग मनु दामिनी॥ [2]
पहिरे पट पीत राते भूषण भूषित मनोहर।
गज बर गोपाल नागर नागरी गज गामिनी॥ [3]
‘दास चतुर्भुज’ दंपति उपमा कहँ नाहिंन औरु।
काम मूरति कमल लोचन मृगनयनी कामिनी॥ [4]

- श्री चतुर्भुज दास

युगल किशोरी-किशोर नवयौवन से युक्त, अनुपम सौंदर्य की दिव्य मूर्तियाँ हैं। श्रीकृष्ण, जो स्वयं कामदेव को मोहित करने वाले हैं, सौंदर्य के सागर हैं; और श्रीराधा, रूप-लावण्य की साक्षात मूर्ति हैं। [1]

एक ओर सुनहरी आभा से दमकती श्रीराधा, और दूसरी ओर मेघ-श्याम श्रीकृष्ण — मानो विद्युत और घन का आलिंगन हो रहा हो। [2]

पीतांबर धारण किए, सुंदर भूषणों से सुशोभित वे दोनों अत्यंत आकर्षक प्रतीत होते हैं। उनकी चाल इतनी मनोहर है कि गजराज की शोभायुक्त चाल को भी परास्त कर रही हो। [3]

श्री चतुर्भुजदास कहते हैं—युगल सरकार की तुलना किसी से नहीं की जा सकती। वे प्रेम के साक्षात स्वरूप हैं — कमल जैसे नेत्रों वाले श्रीकृष्ण और हिरणी-सी चंचल दृष्टि वाली श्रीराधा। [4]