(राग सारंग)
यमुना पुलिन सुभग वृन्दावन,
नवल लाल श्रीगोवर्द्धन धारी। [1]
नवल कुँज नवल वन कुसुमित,
नवल नवल वृषभानु दुलारी॥ [2]
नवल हास नवल छबि क्रीड़त,
नवल हुलास करत सुखकारी। [3]
नवल श्री विठ्ठलनाथ कृपाबल,
नंददास निरखत बलिहारी॥ [4]
यमुना पुलिन सुभग वृन्दावन,
नवल लाल श्रीगोवर्द्धन धारी। [1]
नवल कुँज नवल वन कुसुमित,
नवल नवल वृषभानु दुलारी॥ [2]
नवल हास नवल छबि क्रीड़त,
नवल हुलास करत सुखकारी। [3]
नवल श्री विठ्ठलनाथ कृपाबल,
नंददास निरखत बलिहारी॥ [4]
- श्री नंददास, श्री नंददास ग्रंथावली
सुंदर श्री वृंदावन धाम का नित्य नवीन यमुना पुलिन अत्यंत मनोहर है, जहाँ गोवर्धन को धारण करने वाले नवल श्यामसुंदर विराजमान हैं। [1]
कुंज भी नित्य नवीन हैं, और वन कुसुमों से आच्छादित है, जहाँ नित्य नवीन वृषभानु दुलारी श्री राधा विराज रही हैं। [2]
नित्य नवीन हास-परिहास और क्रीड़ा के दर्शन मन को मोह लेते हैं। प्रिया-प्रियतम नवल हुलास में लीन हैं, जिससे चारों ओर सुख की वर्षा हो रही है। [3]
नित्य नवीन ही श्री विट्ठलनाथ जी विराजमान हैं, जिनकी कृपा के बल से, प्रिया-प्रियतम का दर्शन कर नंददास जी इस अद्भुत रस का आस्वादन करते हुए बार-बार बलिहारी जा रहे हैं। [4]

