अवधादिक हरिधाम को फल वैकुंठ कहंत।
वनरज ऊपर वारिये सो वैकुंठ अनंत॥
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, विशिष्ट दोहा (3)
अवध आदि श्री हरि के जितने भी धाम हैं, उनका फल वैकुंठ धाम की प्राप्ति है। ऐसे अनंत कोटि वैकुंठ धामों को श्री वृन्दावन धाम की रज के ऊपर वार देना चाहिए।

