प्यारो प्यारी झूले क़दम की डारियां - श्री पुरुषोत्तम जी

प्यारो प्यारी झूले क़दम की डारियां - श्री पुरुषोत्तम जी

प्यारो प्यारी झूले क़दम की डारियां।
घनजु गरजे दामिनी दमके, चहूं दिश गोप कुमारियां॥ [1]
ग़ौर श्याम मुखचंद परस्पर, रहत निहार निहारियां ।
‘पुरुषोतम’ प्रभुकी छबि निरखत, छबि पर बलहारियां॥ [2]

- श्री पुरुषोत्तम जी

पिय-प्यारी (श्री राधा-कृष्ण) कदंब वृक्ष की डालियों पर एक संग झूला झूल रहे हैं। आकाश में बादल गरज रहे हैं, बिजली चमक रही है, और चारों ओर गोपियाँ हर्षित हो उठी हैं । [1]

गौरवर्ण और श्यामवर्ण प्रिय युगल एक-दूसरे के मुखचंद्र को प्रेमभरी दृष्टि से निरंतर निहार रहे  हैं। गोपियाँ उस अनुपम सौंदर्य पर इतनी मोहित हैं कि बार-बार अपने प्राणों को प्रिया-प्रियतम की सुंदर छवि पर अर्पित कर रही हैं। [2]