मोहन तड़ाग बाग फूल फल मोहन हैं - श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (14)

मोहन तड़ाग बाग फूल फल मोहन हैं - श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (14)

(कवित्त)
मोहन तड़ाग बाग फूल फल मोहन हैं,
मोहन गाय गिरि गोवर्धन ललाम है। [1]
मोहन मन मोहन धार बहै यमुना की,
मोहन मधुपुरी मोहन नन्द ग्राम है॥ [2]
मोहन हैं गोपीजन ग्वाल वाल मोहन हैं,
मोहन श्रीराधा और मोहन श्रीश्याम है। [3]
मोहन हैं लता पता कुंज सब मोहन हैं,
मोहन स्वरूप यह वृन्दावन धाम है॥ [4]

- डंडी स्वामी श्री हरे कृष्णानन्द सरस्वती ‘हरे कृष्ण’, वृन्दावन शतक (14)

यहाँ के तालाब (तड़ाग), बाग-बगीचे, फूल और फल सब मोहन (मन को मोहित करने वाले) हैं। यहाँ की गायें, पर्वत और गोवर्धन भी मोहन हैं। [1]

यमुना नदी की जो धारा बह रही है, वह भी मन को मोहने वाली मोहन है। मथुरा (मधुपुरी) और नन्दग्राम – दोनों ही मोहन हैं । [2]

गोपियाँ और ग्वालबाल भी मोहन हैं । श्रीराधा भी मोहन ही हैं, और श्रीश्याम (स्वयं श्रीकृष्ण) भी मोहन ही हैं। [3]

लताएँ, पत्ते, कुंज, सब कुछ मन को मोहने वाला है। यह सम्पूर्ण वृन्दावन धाम मोहन अर्थात् श्रीकृष्ण का ही स्वरूप है। [4]