कवधौं सेवाकुंज में, ह्वैंहों श्यामतमाल ।
लतिका करगहि विरमिहैं, ललित लडैतीलाल॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (56)
मैं श्री वृंदावन के सेवा कुंज में कब ऐसा श्याम तमाल वृक्ष बन जाऊँगा, जिसकी लताओं को पकड़कर युगल सरकार श्री श्यामा-श्याम प्रेम भरी लीलाएँ करते हुए विश्राम करेंगे?
लतिका करगहि विरमिहैं, ललित लडैतीलाल॥
- श्री ललित किशोरी, अभिलाष माधुरी, विनय (56)
मैं श्री वृंदावन के सेवा कुंज में कब ऐसा श्याम तमाल वृक्ष बन जाऊँगा, जिसकी लताओं को पकड़कर युगल सरकार श्री श्यामा-श्याम प्रेम भरी लीलाएँ करते हुए विश्राम करेंगे?

