मूलप्रकृतिरूपां त्वां भजामः करुणार्णवाम् ।
संसारसागरादस्मानुद्धराम्ब दयां कुरु ॥
- देवी भागवत (9.50.50) [श्री राधा नमस्कार स्तोत्रम् (5)]
हे श्री राधा ! हे जननी! तुम मूलप्रकृति स्वरूपा एवं करुणा की अगाध सागर हो । हम तुम्हारी उपासना करते हैं, अत: तुम इस संसार-सागर से उद्धार करने की कृपा करो l
संसारसागरादस्मानुद्धराम्ब दयां कुरु ॥
- देवी भागवत (9.50.50) [श्री राधा नमस्कार स्तोत्रम् (5)]
हे श्री राधा ! हे जननी! तुम मूलप्रकृति स्वरूपा एवं करुणा की अगाध सागर हो । हम तुम्हारी उपासना करते हैं, अत: तुम इस संसार-सागर से उद्धार करने की कृपा करो l

