बनाई बने तुम्हारी बात ।
श्रीवृषभानुराय की बेटी यह यश जग विख्यात ॥ [1]
बिना हुकुम तुम्हरे बजरानी टूटे ना तरु पात ।
पुरुषारथ जेते सब झूठे करो कोउ दिनरात ॥ [2]
नेक नज़र करुणाकर देखत दुखी सुखी होजात ।
सरसमाधुरी सेवा को सुख विलसे बिब गुण गात ॥ [3]
- श्री सरस माधुरी
हे किशोरी राधे! केवल आपकी कृपा से ही जीव की बिगड़ी बात सुधर सकती है। हे श्री वृषभानु नंदिनी, श्री राधे! आपकी यह कीर्ति समस्त संसार में विख्यात है। [1]
हे व्रज की महारानी! आपकी आज्ञा के बिना वृक्ष का एक पत्ता भी नहीं गिर सकता। मनुष्य चाहे दिन-रात जितना भी प्रयास करे, आपकी कृपा के बिना सब प्रयत्न निष्फल ही हैं। [2]
आपकी मात्र एक कृपादृष्टि से दीन-हीन भी परमानंद को प्राप्त कर लेता है। सरस माधुरी आपके विविध गुणों का गान कर, आपके महल-टहल के आनंद को प्राप्त करने की याचना करते हैं । [3]
श्रीवृषभानुराय की बेटी यह यश जग विख्यात ॥ [1]
बिना हुकुम तुम्हरे बजरानी टूटे ना तरु पात ।
पुरुषारथ जेते सब झूठे करो कोउ दिनरात ॥ [2]
नेक नज़र करुणाकर देखत दुखी सुखी होजात ।
सरसमाधुरी सेवा को सुख विलसे बिब गुण गात ॥ [3]
- श्री सरस माधुरी
हे किशोरी राधे! केवल आपकी कृपा से ही जीव की बिगड़ी बात सुधर सकती है। हे श्री वृषभानु नंदिनी, श्री राधे! आपकी यह कीर्ति समस्त संसार में विख्यात है। [1]
हे व्रज की महारानी! आपकी आज्ञा के बिना वृक्ष का एक पत्ता भी नहीं गिर सकता। मनुष्य चाहे दिन-रात जितना भी प्रयास करे, आपकी कृपा के बिना सब प्रयत्न निष्फल ही हैं। [2]
आपकी मात्र एक कृपादृष्टि से दीन-हीन भी परमानंद को प्राप्त कर लेता है। सरस माधुरी आपके विविध गुणों का गान कर, आपके महल-टहल के आनंद को प्राप्त करने की याचना करते हैं । [3]

