कोउ कामी क्रोधी कहौ, कोउ लोभी कहो नाऊं।
श्री वृन्दावन छांड़ि कै, अनत न कित हूँ जाऊँ ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (9)
चाहे कोई मुझे कामी कहे, क्रोधी कहे, अथवा लोभी कहे, परंतु मैं वृंदावन को छोड़कर कहीं और नहीं जाऊँगा, चाहे कोई मेरी कितनी ही निंदा करे।
श्री वृन्दावन छांड़ि कै, अनत न कित हूँ जाऊँ ॥
- श्री हित दामोदर दास, नेम बत्तीसी (9)
चाहे कोई मुझे कामी कहे, क्रोधी कहे, अथवा लोभी कहे, परंतु मैं वृंदावन को छोड़कर कहीं और नहीं जाऊँगा, चाहे कोई मेरी कितनी ही निंदा करे।

