प्राण इक द्वै कीन्हे भक्ति-प्रीति-प्रकास - श्री सूरदास, सूर सागर

प्राण इक द्वै कीन्हे भक्ति-प्रीति-प्रकास - श्री सूरदास, सूर सागर

प्राण इक द्वै कीन्हे, भक्ति-प्रीति-प्रकास!
सूर स्वामी स्वामिनी मिली, करत रंग-विलास ॥

- श्री सूरदास, सूर सागर

श्री राधा एवं श्री कृष्ण का प्राण एक ही है परंतु उन्होंने दो रूप धारण किए हैं भक्ति एवं प्रेम को प्रकाशित करने के लिए। श्री सूरदास कहते हैं: स्वामी (श्रीकृष्ण) और स्वामिनी (श्रीराधा) एक संग मिलकर नित्य विहार रस बरसा रहे हैं।