व्यास राधिका-रवन बिनु - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (31)

व्यास राधिका-रवन बिनु - श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (31)

व्यास राधिका-रवन बिनु, कहूँ न पायौ सुख।
डारनि-डारनि मैं फिरयौ, पातनि-पातनि दुख॥

- श्री हरिराम व्यास, व्यास वाणी, सिद्धांत की साखी (31)

श्री राधिका रमण युगल सरकार, जो सबके मूल स्रोत हैं, उनके बिना मुझे कहीं भी सच्चा आनंद प्राप्त नहीं हुआ। संसार की प्रत्येक डाल-डाल पर भटकते-भटकते मैं उलझ गया और हर पत्ते ने मुझे केवल दुःख ही दिया।