रस जस सुनि श्री विपिन के, गुन गन करौं सु गान।
लोटो रज में मगन ह्वै, इहि सम सुख नहि आन॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.71)
श्री वृंदावन रस का यशोगान सुनकर के तुम भी हर्षित होकर गुणगान करो । यहाँ की रज में मगन होकर लोटो क्योंकि वृंदावन के रस के समान कोई अन्य रस कहीं नहीं है ।
लोटो रज में मगन ह्वै, इहि सम सुख नहि आन॥
- श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.71)
श्री वृंदावन रस का यशोगान सुनकर के तुम भी हर्षित होकर गुणगान करो । यहाँ की रज में मगन होकर लोटो क्योंकि वृंदावन के रस के समान कोई अन्य रस कहीं नहीं है ।

