नाम, रूप, लीला ललित, और जानिए धाम।
इनकी सुदृढ़ उपासना, करै रसिक निष्काम॥
- श्री सरस माधुरी
जो श्री राधा-कृष्ण के नाम, रूप, सुंदर लीलाओं और उनके धाम की सुदृढ़ (अनन्य) उपासना करते हैं, उन्हें ही ‘रसिक’ कहा जाता है। इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रसिकों की उपासना पूर्णतः निष्काम और तत्सुखमयी होती है अर्थात् वे केवल श्री राधा-कृष्ण को ही सुख प्रदान करने के उद्देश्य से होती है ।
इनकी सुदृढ़ उपासना, करै रसिक निष्काम॥
- श्री सरस माधुरी
जो श्री राधा-कृष्ण के नाम, रूप, सुंदर लीलाओं और उनके धाम की सुदृढ़ (अनन्य) उपासना करते हैं, उन्हें ही ‘रसिक’ कहा जाता है। इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रसिकों की उपासना पूर्णतः निष्काम और तत्सुखमयी होती है अर्थात् वे केवल श्री राधा-कृष्ण को ही सुख प्रदान करने के उद्देश्य से होती है ।

