प्रणवौं बरसानो सुखधाम - श्रीराधा प्रिया जी (राधिकानाथ जी)

प्रणवौं बरसानो सुखधाम - श्रीराधा प्रिया जी (राधिकानाथ जी)

प्रणवौं बरसानो सुखधाम ।
जहाँ विराजत मोहन श्यामा, कीरति भानु लली श्रीदाम ॥ [1]
विधि-गिरि, पीरी, भानुसर, गह्वर, मोरकुटी अभिराम ।
दान, विलास, मानगढ़-लीला, साँकरी खोर ललाम ॥ [2]
सुरत समरसर ललित बिहारहिं, द्रुमबल्ली व्रत ठाँम।
'राधा-प्रिया' नित सेवत दोऊ, षटऋतु आठों याम॥ [3]

- श्रीराधा प्रिया जी (राधिकानाथ जी)

मैं बरसाने को प्रणाम करता हूँ, जो सुखों का धाम है। जहाँ श्री कृष्ण और श्री राधा, कीर्ति माँ, वृषभानु जी और श्रीदाम विराजते हैं। [1]

जहाँ ब्रह्मपर्वत (पर्वत के रूप में ब्रह्मा जी), पीरी पोखर, भानुसरोवर, गह्वरवन, मोरकुटी जैसे रमणीय स्थल हैं। जहाँ दानगढ़ (दान लीला), विलासगढ़, मानगढ़ (राधा रानी की मान लीला), और साँकरी खोर आदि स्थान हैं जहाँ प्रिया प्रियतम की प्रेमपूर्ण लीलाएँ होती हैं। [2]

जहाँ वृक्षों और लताओं से आच्छादित पावन स्थानों में, श्री राधा कृष्ण में सुरत समर (प्रेम रूपी युद्ध) और मनोहर नित्य विहार होते हैं । श्री राधा-प्रिया कहते हैं कि श्री धाम बरसाना में छः ऋतुओं, आठों पहर, प्रिया प्रियतम की सेवायें करती हैं । [3]