पति के पाँय पलोटहीं सिंधु-सुता गुणवंत - ब्रज के दोहे

पति के पाँय पलोटहीं सिंधु-सुता गुणवंत - ब्रज के दोहे

पति के पाँय पलोटहीं, सिंधु-सुता गुणवंत ।
भानुसुता पद परस कौं, अवसर ताकत कंत ॥

- ब्रज के दोहे

सागर-तनया, गुणों की खान लक्ष्मीजी अपने पति (स्वामी) श्रीहरि के सदा चरण दबाती हैं, परंतु वृषभानु-नंदिनी श्री राधा, जो स्वयं श्रीहरि की भी स्वामिनी हैं, उनके चरण-स्पर्श का अवसर तो स्वयं भगवान श्रीहरि भी सदा खोजते रहते हैं।