पिय पियरी सेज बनाई आज ।
पियरी झलक, चमक सब पियरे, पियरे बसन बने सब काज॥ [1]
पियरे फूल बने सब तन में, पियरी सोभा सहज समाज ।
श्रीललितमोहिनी यह सुख देखत, स्याम तनैं पियरे सब साज॥ [2]
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (47)
प्रियतम ने आज पीली सेज सजाई है। चारों ओर की चमक-दमक भी पीली ही पीली है। अपने अंगों को भी इन्होने पीले वस्त्रों से सजाया है। [1]
इनका सम्पूर्ण शरीर (चन्दन, केसर आदि सुगंधित द्रव्यों के) पीले-पीले फूलों से चित्रित है। पीली शोभा की सहज साम्राज्य-स्वरूपा श्रीकिशोरीजी की स्वर्णिम अंग-कान्ति से श्रीश्यामसुन्दर के अंग-अंग को इस प्रकार सज्जित देखना ही मुझ ललितमोहिनी का सुख है । [2]
पियरी झलक, चमक सब पियरे, पियरे बसन बने सब काज॥ [1]
पियरे फूल बने सब तन में, पियरी सोभा सहज समाज ।
श्रीललितमोहिनी यह सुख देखत, स्याम तनैं पियरे सब साज॥ [2]
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (47)
प्रियतम ने आज पीली सेज सजाई है। चारों ओर की चमक-दमक भी पीली ही पीली है। अपने अंगों को भी इन्होने पीले वस्त्रों से सजाया है। [1]
इनका सम्पूर्ण शरीर (चन्दन, केसर आदि सुगंधित द्रव्यों के) पीले-पीले फूलों से चित्रित है। पीली शोभा की सहज साम्राज्य-स्वरूपा श्रीकिशोरीजी की स्वर्णिम अंग-कान्ति से श्रीश्यामसुन्दर के अंग-अंग को इस प्रकार सज्जित देखना ही मुझ ललितमोहिनी का सुख है । [2]

